Technology ने रंजीत सिंह दिशाले को बनाया Global Teacher Prize 2020 Winner

ranjit sinh dishale

दोस्तों टेक्नोलॉजी का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। कोविड-19 के मुश्किल के समय में हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक टेक्नोलॉजी से जुड़े रहते हैं। मोबाइल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सुबह के अलार्म से लेकर रात को सोने तक हमारे अधिकतर काम मोबाइल से ही होते हैं। पढ़ाई लिखाई, खरीदारी, मेडिकल, खाना बनाना, ऑफिस के काम करना, मनोरंजन, टीवी, वीडियो गेम सब कुछ हम अपने मोबाइल से ही करते हैं। एक टेक्नोलॉजी ही है जिसकी मदद से आज हमारा हर काम बस एक टच से हो जाता है।

कोविड-19 विश्व महामारी के इस मुश्किल समय में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी ने हमारी बहुत मदद की है। शिक्षा में टेक्नोलॉजी के उपयोग ने ही महाराष्ट्र के रंजीत सिंह दिशाले को Global Teacher Price 2020 का विजेता बना दिया है।

Global teacher Price क्या है?

ग्लोबल टीचर प्राइस एक मिलियन डॉलर का एक अमेरिकी पुरस्कार है। यह किसी खास शिक्षक को हर वर्ष दिया जाता है। यह उन्हें दिया जाता है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। ग्लोबल टीचर प्राइस शिक्षकों के महत्व के बारे में बताता है, तथा उनके द्वारा की गए कार्य और प्रयासों को दुनिया भर में भी पहचान दिलाने के लिये दिया जाता है। यह पुरस्कार शिक्षकों द्वारा ना केवल उनके छात्रों पर बल्कि आसपास की समाज पर भी उनके कार्य और प्रयासों के लिए प्रोत्साहित करता है।

Global teacher Price 2020

Global Teacher Price 2020 की घोषणा 3 दिसंबर 2020 को हुई। इस अवार्ड के लिए विश्व भर से 12000 नॉमिनेशन आए थे। जिनमें से 10 लोगों को चयनित किया गया था। और इन 10 लोगों में से भारत के महाराष्ट्र राज्य के रंजीत सिंह दिशाले को विजेता चुना गया। जिन्हें $1 मिलियन डॉलर लगभग 7 करोड़ रुपए की प्राइस मनी दी गई। रंजीत सिंह दिशाले ने लड़कियों की शिक्षा के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया। और उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया, उन्हें सशक्त बनाने में सहायता की। रंजीत सिंह ने इसके लिए डिजिटल एजुकेशन की सहायता ली। लड़कियों को और उनके परिवार वालों को उनकी शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। जिससे वहां की लड़कियों को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से छुटकारा मिल सके और उनका भविष्‍य उज्‍जवल को सके।

रंजीत सिंह दिशाले भारत के युवाओं के लिए एक आदर्श है। उन्होंने अपने अथक प्रयास और परिश्रम से भारत देश का नाम सारे विश्व में रोशन किया है। उनके इस प्रयास से परितेवाड़ी गांव और भारत देश को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई है।

रंजीत सिंह दिशाले ने अपनी 7 करोड़ की प्राइस मनी में से आधी राशि बाकी के 9 चयनित उम्मीदवारों को बांट दी है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी मिलकर अच्छे कार्य करें। QR कोड का उनका इनोवेटिव आइडिया वाकई में काबिले तारीफ है। डिजिटल शिक्षा के उनके प्रयास से आज परीतेवाड़ी गांव की लड़कियों और दूसरे बच्चों की शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा हो गया है।

रंजीत सिंह दिशाले का योगदान

रंजीत सिंह दिशाले महाराष्‍ट्र के परितेवाड़ी गांव के 32 वर्ष के एक प्राइमरी स्‍कूल टीचर हैं। रंजीत सिंह दिशाले ने लड़कियों की शिक्षा के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया। और उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया, उन्हें सशक्त बनाने में सहायता की। रंजीत सिंह ने किताबों में हर चैप्टर में QR कोड लगा दिए। मोबाइल से यह QR कोड स्कैन करके आप उस चैप्टर का वीडियो ऑनलाइन मोबाइल पर देख सकते हैं। इसकी सहायता से लड़कियां और स्कूल के दूसरे सभी बच्चे घर से और किसी भी जगह से पढ़ सकते थे। डिजिटल कंटेंट को मोबाइल की और लैपटॉप की सहायता से QR कोड स्कैन करके कहीं से भी देखा और सुना जा सकता है।

उन्होंने किसी भी चैप्टर को QR कोड में इस तरीके से अपलोड किया कि यदि वह कोई चैप्टर है, तो उसे वीडियो के रूप में और यदि वह कोई कविता है तो उसे ऑडियो के रूप में देखा जा सके। यह सारा डिजिटल कंटेंट उन्होंने खुद तैयार किया जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह बना रहे। इस तरह बच्चे किसी भी परिस्थिति में अपनी पढ़ाई अच्छे ढंग से कर सकते हैं। यह QR कोड किताब के प्रत्येक चैप्टर में होता है।

लॉकडाउन के दौरान सारे स्कूल बंद होने के कारण बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ा। ऐसे में इस लॉकडाउन में भी रंजीत सिंह जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से घर मे रहकर ऑनलाइन क्लास लेकर बच्चों को पढ़ाया। रंजीत सिंह ने बच्चों को मोबाइल के सही उपयोग के बारे में बताया। उनको यह समझाया कि मोबाइल उनके आगे बढ़ने में कितनी मदद कर सकता है।

उन्होंने अपने 10 साल की मेहनत से एक छोटे से गांव में डिजिटल एजुकेशन को पहुंचाया। एक सरकारी प्राइमरी स्कूल को आधुनिक प्राइवेट स्कूल से भी बेहतर बना दिया, और वै‍श्विक स्‍तर पर पहचान दिलवाई। लोगों की सरकारी स्कूल के प्रति नकारात्मकता को भी दूर किया।

रंजीत सिंह के इनोवेटिव एजुकेशन आइडिया को माइक्रोसॉफ्ट ने भी सराहा और इसे दुनिया के 300 बेहतरीन अविष्कारों में शामिल किया।
इस समय वह 11 देशों के स्कूल के लिए QR कोड वाली किताबें बना रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने रंजीत सिंह के इस अविष्कार को देखकर बाल भारती की सभी किताबों में अब QR बार कोड लगाना शुरू कर दिया है।

बच्चों को शिक्षा के प्रति सजग बनाने के लिए उन्होंने वर्चुअल फील्ड ट्रिप नाम से एक योजना भी शुरू की है, जिसमें वह अलग-अलग देशों के छात्रों से अपने स्‍कूल के बच्चों की बातचीतभी कराते हैं। रंजीत सिंह ने टेक्नोलॉजी की हेल्प से बच्चों की एजुकेशन को बेहतर कर दिया है। अब वह दूसरे देश के बच्चों से बिना किसी झिझक के इंग्लिश में बात करते हैं। इसके साथ ही उन देशों के छात्रों से उनकी भाषा, उनकी बातचीत का तरीका, उनके बोलने का ढंग भी सीखते हैं। इसके साथ ही उन्हें मराठी भाषा में भी समझाते हैं।

रंजीत सिंह जी ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जो टेक्नोलॉजी यूज़ की है उसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर, वीडियो कॉल एप्लीकेशन, मोबाइल, इंटरनेट, वीडियो QR Code जनरेटर, ऑनलाइन क्लासेस सॉफ्टवेयर आदि शामिल हैं।

2 thoughts on “Technology ने रंजीत सिंह दिशाले को बनाया Global Teacher Prize 2020 Winner”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *